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Tuesday, April 13, 2021
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‘बंगाल’ बनता पंजाब, आंदोलन की आड़ में उपद्रव

किसान आंदोलन के नाम पर पंजाब में जिस तरह की अराजकता फैली है इससे ऐसा लगने लगा है कि पंजाब अब वो पंजाब नहीं रहा, जिसके लिए वह जाना जाता है। पिछले दिनों मुक्तसर साहिब के मोलोट में भाजपा विधायक पर हुए जानलेवा हमले ने पंजाब को ‘बंगाल’ साबित करने कोई कसर नहीं छोड़ी। उल्लेखनीय है कि गत माह पंजाब के मलोट में प्रदेश सरकार की चार साल की नाकामियां बताने मलोट पहुंचे अबोहर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अरुण नारंग पर जिस तरह से किसानों ने कृषि सुधार कानून रद करने की मांग को लेकर जानलेवा हमला किया उसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

वह भी तब जब पुलिस घेरे में चल रहे विधायक नारंग को खींच कर न केवल उन्हें गालियां दी गईं, बल्कि उनके कपड़े फाड़ निर्वस्त्र कर पिटाइ भी की गई। यह घटना सरकार और वहां की पुलिस पर भी सवालिया निशान खड़े करती है। क्योंकि यह सब कुछ पुलिस की मौजूदगी में हो रहा होता है और मलोट पुलिस कोई ठोस कार्रवाई करने की बजाय मूक दर्शक बने तमाशा देख रही होती है। पंजाब सरकार पर भी सवाल इस लिए खड़ हो रहे हैं क्योंकि पहले भी भाजपा नेताओं पर हमले की कोशिशें और उनका विरोध किया जाता रहा है। (बंगाल’ बनता पंजाब)

लेकिन तथाकथित राजनीतिक लाभ के लिए पदेश में सत्तासीन कांग्रेस सरकार के मुखिया कैप्टन अमरिंदर और प्रमुख विपक्षी दल शिअद और ‘आप’ खामोश रहती है। क्योंकि उन्हें किसानों का वोट बैंक खिसकने का डर है। हलांकि पंजाब के मुख्यमंत्री ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ लोग इस घटना को पंजाब की अमन शांति को भंग करने की साजिश के रूप में भी देख रहे हैं। उनका कहना है कि किसान आंदोल की आड़ में पंजाब का माहौल बिगाड़ने की कोशिशें की जा रही हैं।

कौन हैं अरुण नारंग

अरुण नारंग भारती जनता पार्टी के मलोट से विधायक हैं और इस समय वह फालिल्का के जिला अध्यक्ष भी हैं। यही नहीं वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव नारंग ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और गुरदासपुर के पूर्व सांसद सुनील जाखड़े के बेटे को चुनाव हराकर यह सीटी जीती थी।

हमलों पर कार्रवाई हुई होती तो आज यह नहीं होता (बंगाल’ बनता पंजाब)

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रो: लक्ष्मीकांता चावला ने किसान आंदोलन के नाम पर हुए इस उपद्रव की आलोचना करते हुए कहती हैं कि यह पंजाब सरकार पहले ही हमलों पर कार्रवाई की होती तो ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कृषि सुधार कानूनों के पास होते ही किसान आंदोलन के नाम पर जिस तरह से भाजपा और भाजपा नेताओं को निशाना बनाया जाता रहा और सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए तमाशा देखती रही। आज यह भयावह रूप लेता जा रहा है। चावला ने कहा कि लोक तंत्र में अपनी बात रखने और रोष प्रदर्शन का अधिकार सबको है पर किसी पर जानलेवा हमला करना, उसके कपड़े फाड़ नंगा कर देना यह कतई लोकतांत्रिक नहीं है। हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

कब- कब हुए भाजपा नेताओं पर हमले

अरुण नारंग पर किसानों का यह हमला पहला हमला नहीं है। इसे पहले भी कई बार हमले हुए। भाजपा के कार्यक्रम में कुर्सियां तोड़ी गईं। नेताओं का विरोध किया गया। यहां तक तक नगर कौंसिल और नगर निगम चुनावों में भाजपा पत्याशियों को धमकाया भी गया।

13 अक्टूबर 2020 को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा पर होशियारपुर जिले के टांडा में उस समय हमला हुआ जब वह जालंधर में किसी कार्यक्रम शामिल हो कर अपने घर पठानकोट जा रहे थे। इसी दौरान टोल प्लाजा पर धरने पर बैठे किसान नेताओं ने उनका हमला कर दिया। केस दर्ज करवाने के लिए भाजपा नेता मुकेरियां थाने में बैठे रहे लेकिन न तो पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई की और ना ही सरकार ने।

25 दिसंबर 2020 में बठिंडा में भाजपा का कार्यक्रम था। यहां प्रदेश की कई बड़े भाजपा नेता पहुंचे थे। यहां भी कृषि सुधार कानून का विरोध कर रहे किसानों ने कार्यक्रम में घस कर कुर्सिया तोड़ी और उपद्रव मचाया। बठिंडा शिअद अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल की पत्नी और पूर्व फूड एंव प्रसंस्करण मंत्री रहीं हरसीमरत कौर बादल का संसदीय क्षेत्र भी। यही नहीं कांग्रेस सरकार के खजाना मंत्री मनप्रीत सिंह बादल यहां से विधायक भी हैं। इस घटना के दौरान भी पंजाब सरकार मौन रही।

एक जनवरी 2021 को होशियारपुर में पूर्व मंत्री और भाजपा नेता तीक्ष्ण सूद के घर पर गोबर फेंका गया। इस होशियारपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री सोमप्रकाश कैंथ का भी कई बार घेराव हुआ तब भी राज्य सरकार मौन रही। 25 मार्च 2021 को बठिंडा में पूर्व मंत्री सुरजीत ज्याणी के साथ भी अभद्रता की गई। इस दौरान भी कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन मौन रहा। यानी कहीं न कहीं कथित तौर पर राज्य सरकार और अन्य दलों की आंदोलन के नाम उपद्रवकरने वालों को मौन समर्थन मिलता रहा।

मोबाइल टावर तोड़े तब भी चुप्प रही सरकार

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि कांग्रेस गंदी राजनीति को जन्म दे रही है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोन के नाम पर एक निजी कंपनी को जिस तरह से निशाना बना कर उसके 1600 के करीब मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया गया। ट्रेने रोकी गई। उस सयम भी कानून व्यवस्था की दुहाई देने वाली कैप्टन सरकार ने कुछ नहीं किया। क्योंकि उन्हें वोट प्रभावित होने का डर है। उन्होंने कहा कि यह सब कुछ प्रदेश की कैप्टन सरकार के इशारों पर हो रहा है। पंजाब में इमरजेंसी जैसे हालत हैं।

कैप्टन इस्तीफा दें

इधर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अश्वीन शर्मा ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। कैप्टन सरकार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला करने वालों के खिलाफ तुरंत और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज से पहले पंजाब में ऐसी घटनाएं कभी देखी नहीं थी। इस तरह की घटनाएं बिहार और बंगाल में होती हैं। बंगाल में सरकार के ‘गुंडे’ बम फोड़ते हैं। पंजाब भी बंगाल के रास्ते पर चल पड़ा है।

हिंसा की कोई जगह नहीं

अरुण नारंग के साथ हुई घटना की निंदा करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोक तंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि इस तरह की घटनाएं किसान आंदोलन को कमजोर करती हैं। और भाजपा को किसानों के खिलाफ बोलने का मौका देती हैं।

शिअद ने लगाया सरकार पर नाकामी का आरो

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि लोक तंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। लेकिन रास्ता गलत नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को मामले की जांच करवानी चाहिए कि हमलावर कौन थे।

सड़कों पर उतरी भाजपा

अब तक शांत बैठी भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में मुखर हो गई है। सरकार पर कानून व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहने और अराक तत्वों को शह देने का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा से लेकर छोड़े-बड़े नेताओं ने भी रोष प्रदर्शन कर हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी है।

नारंग नहीं विधानसभा हुई नंगी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्यपाल से कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा कि मलोट में भाजपा विधायक अरुण नारंग बल्कि पंजाब विधानसभा नंगी हुई है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के नाम यह हिंदू और सिखों को लड़ाने की साजिश रची जा रही है। आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

अब तक 30 से अधिक लोगों की पहचान का दाव

घटना की वीडियो फुटेज के आधार पर एसएसपी डी सुडवीली से 30 से अधिक आरोपितों की पहचान की पुष्टी की है। उनका कहना है कि अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। सभी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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